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Shiv Sena Crises News in Hindi: क्या महाराष्ट्र में फिर दोहराएगा इतिहास? उद्धव सेना पर फिर मंडराया संकट!

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Shiv Sena Crises News in Hindi: क्या महाराष्ट्र में फिर दोहराएगा इतिहास? उद्धव सेना पर फिर मंडराया संकट!

पश्चिम बंगाल में बगावत की राजनीति अभी शांत भी नहीं हुई थी कि महाराष्ट्र राज्य की राजनीति में बड़ा सियासी संकट मंडराते हुए नजर आ रहा है। TMC (तृणमूल कांग्रेस) की स्थिति से हर कोई वाकिफ है, लेकिन इसी बीच महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने की चर्चा तेज हो गई है। 4 साल पहले एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। अब एक बार फिर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) पर संकट के बादल मंडराते (Shiv Sena Crises News in Hindi) दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है कि पार्टी के कई लोकसभा सांसद अलग रास्ता चुन सकते हैं।

अगर ऐसा होता है तो यह केवल सांसदों की संख्या घटने का मामला नहीं होगा, बल्कि उद्धव ठाकरे की राजनीतिक ताकत, विपक्षी गठबंधन में उनकी भूमिका और महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी पकड़ पर भी सीधा प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से मुंबई से लेकर दिल्ली तक बैठकों और राजनीतिक संपर्कों का दौर तेज हो गया है। हालांकि, अब तक किसी भी सांसद की ओर से खुलकर बगावत का ऐलान नहीं किया है, लेकिन लगातार उठ रही अटकलों ने सियासी पारा जरूर बढ़ा दिया है।

Shiv Sena Crises News in Hindi: लोकसभा चुनाव 2024 के बाद शिवसेना में टूट की चर्चा

लोकसभा चुनाव 2024 में शिवसेना (UBT) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 सांसद संसद भेजे थे। लेकिन अब इन्हीं सांसदों को लेकर बगाबत की खबरे लगातार बढ़ती जा रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मातोश्री में उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक बुलाकर एकजुटता दिखाने की कोशिश की, लेकिन सभी सांसदों का व्यक्तिगत रूप से उस बैठक में मौजूद न होना कई गंभीर सवाल खड़े कर गया।

दूसरी ओर मुंबई साउथ से सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर किसी भी संभावित ब्रेकअवे ग्रुप को मान्यता नहीं देने की मांग की। इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी नेतृत्व भी संभावित राजनीतिक खतरे को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि, कुछ पार्टी नेताओं का दावा है कि शिवसेना पूरी तरह एकजुट है और टूट की खबरें महज अफवाह हैं, जिन पर ध्यान न दिया जाए।
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शिवसेना में बगावत: मातोश्री की बैठक और गायब सांसदों का सच

सूत्रों के हवाले से खबरें आ रही हैं कि शिवसेना (UBT) के भीतर असंतोष की चर्चा काफी समय से चल रही है। एकनाथ शिंदे के दिल्ली दौरे और कुछ सांसदों की राजधानी में मौजूदगी ने इन अफवाहों को आग की तरह फैला दिया है। वहीं, अभी तक न तो कोई आधिकारिक टूट हुई है और न ही किसी सांसद ने अलग गुट बनाने की घोषणा की है। लेकिन अगले कुछ दिनों में स्थिति और साफ हो सकती है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व और संभावित असंतुष्ट सांसदों के बीच संपर्क लगातार जारी है।

शिवसेना के बागी सांसद: उद्धव ठाकरे की पार्टी के संभावित बागी सांसद कौन हैं?

मिली जानकारी के मुताबिक, ऐसी खबरें सामने आ रही है कि शिवसेना के ये नेता बगाबत कर सकते हैं। इनमें संजय जाधव परभणी लोकसभा सीट से सांसद हैं और 2014 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। लेकिन मातोश्री में हुई बैठक में वे व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं रहे और फोन के जरिए संपर्क में बताए गए। राजनीतिक हलचलों में उनका नाम संभावित बागी सांसदों में सबसे ऊपर लिया जा रहा है। मराठवाड़ा क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है। इसलिए, उनकी अगली राजनीतिक चाल पर सबकी नजर टिकीं हुई है।

संजय देशमुख यवतमाल, वाशिम लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। हाल ही में, उनकी केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात हुई, जो कि चर्चा का विषय बनी। हालांकि उन्होंने इसे क्षेत्रीय विकास से जुड़ी मुलाकात बताया। बगावत की चर्चाओं में उनका नाम सबसे ज्यादा उछाला जा रहा है। उन्हें संभावित रूप से शिंदे गुट के करीब माना जाता है।

शिरडी लोकसभा सीट से सांसद बाबासाहेब वाकचौरे भी चर्चा में हैं। वे पहले कांग्रेस और BJP में भी रह चुके हैं और बाद में उद्धव गुट में लौटे थे। मातोश्री की बैठक के दौरान उनसे संपर्क नहीं हो पाने की खबरें सामने आई थीं। राजनीतिक गलियारों में उनके नाम को संभावित बगाबत वाले खेमे से जोड़ा जा रहा है। बता दें कि शिरडी क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पहचान है, ऐसे में अगर वे पार्टी छोड़ते हैं, तो यह उद्धव सरकार के लिए एक बड़ा नुकसान हो सकता है।

उद्धव ठाकरे को मिल सकता है बड़ा झटका: मराठवाड़ा और नासिक के सांसदों की राजनीतिक स्थिति

नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर हिंगोली सीट से सांसद हैं। रिपोर्ट्स  में उनका नाम भी संभावित असंतुष्ट सांसदों में शामिल किया गया है। मराठवाड़ा की राजनीति में उनकी हमेशा सक्रिय भूमिका रही है। मातोश्री बैठक में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हुई थीं। हालांकि, उनकी तरफ से अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। वहीं, धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर कोर्ट की कार्यवाही में व्यस्त होने के कारण बैठक में नहीं पहुंचे, जिससे उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हैं। दूसरी ओर, नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे ने बगावत की खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहने की बात कही है।

उद्धव ठाकरे न्यूज: संकट के बीच शिवसेन के वफादार नेता

टूट के बीच शिवसेना (Shiv Sena Crises News in Hindi) के कई ऐसे नेता हैं, जो कि पार्टी का साथ देते हुए नजर आ रहे हैं। संजय दिना पाटिल का नाम भी शुरुआती दौर में चर्चाओं में आया था। लेकिन उन्होंने साफ कहा है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं। मुंबई नॉर्थ ईस्ट सीट से सांसद पाटिल पार्टी के पुराने नेताओं में गिने जाते हैं और उन्होंने किसी भी तरह की बगावत की खबरों को सिरे से खारिज किया है। इसके बावजूद भी राजनीतिक हलकों में उनके नाम पर चर्चा बनी हुई है।

अरविंद सावंत भी शिवसेना के सबसे वरिष्ठ और भरोसेमंद नेताओं में से एक माने जाते हैं। बता दें कि सावंत मुंबई साउथ सीट से सांसद हैं और वे पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। बगावत की अफवाहों के बीच उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर किसी भी ब्रेकअवे ग्रुप को मान्यता न देने की मांग की है। उद्धव ठाकरे के प्रति उनकी ईमानदारी और निष्ठा पर कभी भी सवाल नहीं खड़े हुए। वे इस पूरे विवाद में पार्टी का सबसे मजबूत बचाव करते नजर आ रहे हैं।

अनिल देसाई उद्धव ठाकरे के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। वे मुंबई साउथ सेंट्रल से सांसद हैं और पार्टी के संगठनात्मक मामलों में अपना भरपूर सहयोग देते हैं। सूत्रों के अनुसार, वे भी शिवसेना के साथ मजबूती से खड़े हुए हैं। दिल्ली में भी वे पार्टी नेतृत्व के साथ सक्रिय हैं। वे शिवसेना (UBT) की एकता बनाए रखने की कोशिशों में अपना मुख्य रोल अदा कर रहे हैं।

Shiv Sena Latest News: शिवसेना में टूट की अफवाह!

महाराष्ट्र की इस ताजा राजनीतिक हलचल (Shiv Sena Crises News in Hindi) ने राज्य के सियासी तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिन उद्धव ठाकरे की पार्टी और महाविकास के भविष्य के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं। इसी बीच अगर कोई सांसद पार्टी बदलने का फैसला लेता है, तो राज्य का पूरा राजनीतिक समीकरण एक बार फिर पूरी तरह बदल जाएगा। पूरी जनता और विश्लेषकों की निगाहें अब मातोश्री की अगली रणनीतियों और दिल्ली के घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।

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