Kashi Vishwanath Temple In Hindi: काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़ा रोचक रहस्य!
Kashi Vishwanath Ka Mandir जिसे स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का नाम सुनते ही लोगों के मन में श्रद्धा और भक्ति की भावना जग जाती है। कहा जाता है कि इस जगह पर सबसे पहले शिवलिंग की स्थापना हुई थी। यही पर भगवान शिव ने शिवलिंग के रूप में प्रकाश स्तंभ को प्रकट करके देवों के देव होने का गौरव प्राप्त किया था, तभी से यह मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वंय निवास करते हैं।
काशी को न सिर्फ बनारस और वाराणसी के नाम से जाना जाता है, बल्कि इसे ‘मोक्ष नगरी’ (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) भी कहा जाता है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग काशी में मौजूद है, जिसे बाबा विश्वनाथ के नाम से भी जाना जाता है। आज भी यहां देश-विदेश से लाखों-करोड़ो लोग बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर कहां है? (Kashi Vishwanath Mandir Kahan Hai)
(Kashi Vishwanath Ka Mandir) भारत के प्रमुख और प्राचीन शहर वाराणसी (बनारस) में स्थित है। यह पवित्र मंदिर गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। यह जगह हिंदू एवं सनातन धर्म में बहुत ही पवित्र मानी जाती है। माना जाता है कि बनारस भगवान शिव की प्रिय नगरी है।
कहा जाता है कि काशी नगरी भगवान शिव के त्रिशूल की नोक पर बसी हुई है, जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ विराजमान हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास (Kashi Vishwanath Temple History In Hindi)
काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) का इतिहास बेहद ही रोचक और प्राचीन है। पुराणों के अनुसार, काशी पहले भगवान विष्णु की पुरी थी, जहां श्रीहरि के आनंदाश्रु गिर गए थे। उसके बाद वहां एक बिंदु सरोवर बन गया और प्रभु यहां पर बिंधुमाधव के नाम से प्रतिष्ठित हो गए। माना जाता है कि महादेव को काशी इतनी भा गई कि उन्होंने विष्णु जी से इसे अपने नित्य आवास के लिए मांग लिया था। उसी के बाद से यह भगवान शिव का निवास स्थान बन गई।
इतिहासकारों की मानें, तो इस मंदिर को सन् 1194 में मुहम्मद गौरी द्वारा तुड़वाया गया था। इस दोबारा बनाने के बाद सन् 1447 में जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह द्वारा तोड़ दिया गया था। इसके बाद सन् 1585 ई. में पं. नारायण भट्ट द्वारा राजा टोडरमल की सहायता से इस मंदिर का पुन: निर्माण किया गया। सन् 1632 में शाहजहां का आदेश पारित होने पर इसे तोड़ने के लिए सेना भिजवाई गई, लेकिन हिंदुओं के प्रतिरोध के कारण इस मंदिर को तोड़ा नहीं जा सका, लेकिन काशी के अन्य मंदिर तोड़ दिए गए थे। सन् 1669 में औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था और उसी साल मंदिर (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) को तोड़ दिया गया।
सन्-1777-80 में इंदौर की रानी अहिल्याबाई द्वारा का मंदिर का जीर्णोदद्धार करवाया गया। इस स्थान में विश्वनाथ मंदिर बनवाया गया जिस पर पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने सोने का छत्र बनवाया था। इसी वजह से इसे ‘Golden Temple Of Kashi’ भी कहा जाता है। वहीं ग्वालियर की महारानी बैजाबाई ने ज्ञानवापी का मंडप बनवाया और महाराजा नेपाल ने विशाल नंदी प्रतिमा भी स्थापित करवाई थी।
काशी विश्वनाथ महादेव मंदिर का धार्मिक महत्व (Kashi Vishwanath Mahadev Mandir)
(Kashi Vishwanath Mahadev Mandir) को भगवान शिव के सबसे पवित्र धामों में से एक गिना जाता है। काशी में स्थापित शिवलिंग को ‘विश्वेश्वर’ या ‘विश्वनाथ’ भी कहा जाता है। इसका अर्थ है - संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी में मनुष्य के देहावसान पर स्वयं महादेव उसे मुक्तिदायक तारक मंत्र का उपदेश करते हैं। काशी को कई वर्षों से हिंदू मोक्ष तीर्थ स्थल माना जाता है। माना जाता है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके मोक्ष हेतु मृत्यु की अस्थियां यहीं गंगा में विसर्जित की जाती हैं। इस शहर को सप्तमोक्षदायिनी नगरी में से एक माना जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) की सावन माह और महाशिवरात्रि के दिन विशेष महिमा देखने को मिलती है।
ओल्ड काशी विश्वनाथ मंदिर (Old Kashi Vishwanath Mandir)
जब भी काशी विश्वनाथ मंदिर की बात उठती है, तो लोग (Old Kashi Vishwanath Mandir) के बारे में जानने के लिए उत्साहित रहते हैं। बता दें इस प्राचीन मंदिर का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है। इसे जितनी बार ध्वस्थ किया गया, उतनी ही बार इसका पुनर्निमाण किया गया। वैसे तो पुरानी काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) का मूल स्थान वही माना जाता है, जहां आज भी ज्ञानवापी परिसर स्थित है। माना जाता है कि मंदिर पर आकमण के वक्त वहां के पुजारियों ने शिवलिंग को सुरक्षित रखने के लिए ज्ञानवापी कुएं में छिपा दिया था। आज भी उस कुएं को बहुत पवित्र माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, यह भूमि भगवान शिव के त्रिशूल की नोक पर टिकी हुई है। ऐतिहासिक साक्ष्यों की मानें, तो यह स्थल कई शताब्दियों पुराना है।
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काशी विश्वनाथ मंदिर कैसे पहुंचे?
| सड़क मार्ग | रेल मार्ग | हवाई मार्ग |
| काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) के लिए रोडवेज के अलावा प्राइवेड बसें भी जाती हैं। रोडवेज बस स्टैंड या शहर के किसी भी हिस्से से गोदौलिया के लिए साधन मिल जाते हैं। गोदौलिया से दसाश्वमेध घाट की ओर बढ़ने पर सिंहद्वार है, जो ढुंढिराज गणेश की तरफ से मंदिर पहुंचा देता है। बांसफाटक की ओर से विश्वनाथ गली जाने वाला मार्ग भी मंदिर की ओर लेकर जाता है। ज्ञानवापी की तरफ से भी मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए द्वार बना हुआ है। | वाराणसी में 4 रेलवे स्टेशन हैं। मंदिर से वाराणसी जंक्शन की दूरी 6 कि.मी., बनारस रेलवे स्टेशन की दूरी 4 कि.मी., मुगल सराय रेलवे स्टेशन की दूरी 17 कि.मी. और वाराणसी स्टेशन की दूरी 2 कि.मी. है। स्टेशन के बाहर से ही मंदिर के लिए ऑटो, टैक्सी जैसे साधन उपलब्ध हैं। | हवाई मार्ग की बात करें, तो बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट देश-विदेश के सभी शहरों से जुड़ा हुआ है। यहां से मंदिर की दूरी लगभग 20 से 25 कि.मी. है। एयरपोर्ट से कैब या टैक्सी लेकर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। |
काशी विश्वनाथ मंदिर की मुख्य आरती
मंदिर कोई भी हो वह आरती के बिना अधूरा ही होता है। खास तौर से जब बात काशी विश्वनाथ मंदिर की हो रही हो, जिसे भोलेनाथ की नगरी भी कहा जाता है। यहां के कण-कण में भगवान शिव का नाम गूंजता है। आइए काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) में होने वाली मुख्य आरती के बारे में विस्तार से जानते हैं -
1) मंगला आरती : इसमें सबसे पहले स्थान पर मंगला आरती आती है, जो सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह आरती सुबह के 3 से 4 बजे के बीज होती है। शास्त्रों के अनुसार, यही वह समय है जब महादेव अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में प्रवेश करते हैं। इस आरती को करने से भक्तों का पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
2) भोग आरती: यह आरती दोपहर के समय की जाती है, जब बाबा विश्वनाथ को भोग लगाया जाता है। इस आरती के दौरान ही भोलेनाथ को अलग-अलग प्रकार के व्यंजन और फल अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस आरती में शामिल होते हैं, उनके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
3) संध्या आरती: यह आरती तब की जाती है, जब दिन और रात का मिलन हो रहा होता है। मान्यताओं के अनुसार, इस समय नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना सबसे आसान माना जाता है। इस आरती की ध्वनि और मंत्रों का उच्चारण करने से ही पूरा वातावरण शुद्ध हो जाता है।
4) श्रृंगार आरती: रात के समय की जाने वाली आरती श्रृंगार आरती कहलाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस आरती में बाबा को फूलों, आभूषणों और सुगंधित द्रव्यों से श्रृंगार किया जाता है। यह आरती भोलनेनाथ के ऐश्वर्य और सुदंरता का प्रतीक मानी जाती है।
5) शयन आरती: पूरे दिन में होने वाली अंतिम आरती को शयन आरती कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस आरती के बाद भोलेनाथ विश्राम के लिए चले जाते हैं। शयन आरती करने से मनुष्य को न सिर्फ भय से मुक्ति मिलती है, बल्कि उसे रात में अच्छी नींद भी आती है।
काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन से जुड़ी अहम जानकारी
काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) के दर्शन करने जाने से पहले कुछ अहम जानकारी जरूर जान लें। यह बातें दर्शन के समय बहुत काम आएंगी -
1) बनारस के बाजार में गौदोलिया चौराहे जिसे नंदी चौराहा भी कहते हैं। यहां से काशी विश्वनाथ मंदिर की तरफ जाते हुए मुख्य द्वार संख्या 4 पर पहुंचते हैं। यहां बाहर ही मोबाइल, बैग आदि जमा करने के लिए मंदिर प्रशासन एवं दुकानों द्वारा लॉकर्स की सुविधा दी गई है। यहां समान जमा करके आप बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकते हैं।
2) काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की संख्या के अनुसार ज्योतिर्लिंग के दर्शन 4 दिशाओं से करवाए जाते हैं। इससे लाइन में ज्यादा समय नहीं लगता है।
3) यहां मुख्य द्वार संख्या - 1 से मंदिर में प्रवेश करने पर लॉकर की व्यवस्था गंगा द्वार के बाहर ही है। यहां मुख्य मंदिर के दर्शन करीब से होते हैं।
4) मुख्य द्वार 1 पर नाव के जरिए भी पहुंचा जा सकता है क्योंकि यह ललिता घाट पर बना हुआ है। आप गेट नंबर 4 से चलकर मणिकर्णिका घाट जाने वाले रास्ते से भी गेट नंबर 1 तक पहुंच सकते हैं। यह दोनों घाट आस-पास स्थित हैं।
5) भगवान विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करके आप गेट नंबर 2 की तरफ से बाहर निकलकर विशालाक्षी मंदिर के दर्शन करने के लिए भी जा सकते हैं। ये माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
6) यह शक्तिपीठ मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित है। यहां पहुंचने में आपको ज्यादा समय नहीं लगेगा।
मंदिर में दर्शन करने का समय
बता दें काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) रात में 3 बजे ही खुल जाता है क्योंकि इस समय मंगला आरती होती है। मंगला आरती के बाद मंदिर को 4 बजे भक्तों के लिए खोला जाता है। दर्शन करने के लिए मंदिर सुबह के 4 बजे से रात 11 बजे तक भक्तों के लिए खुलता है। दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक भक्त ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर कब जाने की विशेष महिमा होती है?
काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple In Hindi) की मान्यता की वजह से भक्त पूरे वर्ष भारी संख्या में यहां दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन कुछ समय पर भगवान शिव की महिमा विशेष तौर पर देखने को मिलती है -
1) महाशिवरात्रि
2) सावन माह
3) कार्तिक माह
4) सोमवार के दिन
5) देव दीपावली
निष्कर्ष :
काशी विश्वनाथ मंदिर केवल एक पवित्र धाम नहीं है, बल्कि इस मंदिर से लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास जुड़ा हुआ है। गंगा नदी के तट पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग लोगों को सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। इ मंदिर का इतिहास लाखों वर्षों पुराना है। यहां की दिव्य आरती, गंगा घाट एवं भक्तिमय माहौल इस स्थान को और खास बनाता है।
(Kashi Vishwanath Ka Mandir) न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि भारतीय संस्कृति, भगवान शिव की पहचान भी है। यहां आने वाला हर श्रृद्धालु भोलेनाथ पर अटूट विश्वास रखकर आता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1) मोक्ष की नगरी
2) गंगा घाट और आध्यात्मिक वातावरण
3) सांस्कृतिक अनुभव
4) सर्वोच्च ज्योतिर्लिंग
5) मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा
6) काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर
1) इसका इतिहास हजार वर्षों पुराना है।
2) इस मंदिर का शिखर सोने का बना हुआ है।
3) यहां के ज्ञानवापी कुएं का महत्व अद्भुत है।
4) यहां पर महाशिवरात्रि और सावन माह में अद्भुत माहौल देखने को मिलता है।
5) ये मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।
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