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Bear Market vs Bull Market in Hindi: शेयर बाजार में बुल और बियर मार्केट क्या होता है?

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Bear Market vs Bull Market in Hindi: शेयर बाजार में बुल और बियर मार्केट क्या होता है?

अक्सर आपने देखा होगा कि जब भी आप टीवी पर बिजनेस न्यूज चैनल खोलते हैं या अखबार में बिजनेस का पन्ना पढ़ते हैं, तो आपको Bulls और Bears जैसे शब्द सुनाई देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि Bear Market vs Bull Market in Hindi का असली मतलब क्या है? शेयर बाजार की दुनिया में इन दो जानवरों के नामों का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक नए और समझदार निवेशक के लिए इन दोनों शब्दों को समझना उतना ही जरूरी है जितना गाड़ी चलाने से पहले एक्सीलेटर और ब्रेक के बारे में जानना ज़रूरी होता है। हकीकत तो यह है कि अगर आप बाजार के इन दोनों बातों के बारें में अच्छा और सही ज्ञान नहीं है, तो आपकी मेहनत की कमाई डूब सकती है। इस लेख में हम बहुत ही सरल भाषा में जानेंगे कि share Market Me Bull and Bear Kya Hota Hai, इनके बीच क्या अंतर है और दोनों परिस्थितियों में आपको अपने पैसों को कैसे संभालना चाहिए।

Bulls और Bears मार्केट क्या है?

जानकार बताते हैं कि शेयर बाजार (Bear Market vs Bull Market in Hindi) का स्वभाव हमेशा एक जैसा नहीं रहता है। यह कभी बहुत तेजी से ऊपर भागता है, तो कभी अचानक नीचे गिरने लगता है। बाजार के इसी उतार-चढ़ाव को दर्शाने के लिए Bull और Bear शब्दों का उपयोग किया जाता है।

क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प तर्क है। जब सांड यानी कि Bull अपने दुश्मन पर हमला करता है, तो वह अपने सींगों को नीचे से ऊपर की तरफ उठाता है। इसलिए जब बाजार ऊपर की तरफ जाता है, तो उसे 'बुल मार्केट' कहते हैं। दूसरी तरफ, जब भालू यानी कि Bear हमला करता है, तो वह अपने पंजों को ऊपर से नीचे की ओर मारता है। इसी वजह से जब बाजार (Bear Market vs Bull Market in Hindi) में लगातार गिरावट आती है, तो उसे 'बियर मार्केट' कहा जाता है।

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तेजी और मंदी का बुनियादी अंतर क्या है?

  1. बुल मार्केट (तेजी): इसमें चारों तरफ सकारात्मक माहौल होता है। शेयर की कीमतें लगातार बढ़ती हैं और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत दिखाई देती है।
  2. बियर मार्केट (मंदी): इसमें बाजार में निराशा का माहौल होता है। शेयरों के दाम लगातार गिरते हैं और लोग नया निवेश करने से डरते हैं।

क्या होता है Bear और Bulls मार्केट?

एक्सपर्ट्स हमेशा यह सलाह देते हैं कि मार्केट में कदम रखने से पहले हर निवेशकर्ता को इन दोनों मार्केट के बारें में अच्छे से पता होना बेहद ज़रूरी होता है। नीचे इन दोनों ही मार्केट के बारें में अच्छे से समझाया गया है ताकि आपके मन में कोई उलझन न रहे कि Bull or Bear Market Kya Hota Hai?

1.Bull Market क्या होता है?

जब शेयर बाजार (Bear Market vs Bull Market in Hindi) में मुख्य इंडेक्स जैसे कि भारत में सेंसेक्स और निफ्टी अपने पिछले निचले स्तर से 20% या उससे अधिक बढ़ जाते हैं और यह बढ़त लंबे समय तक बनी रहती है, तो उसे आधिकारिक तौर पर 'बुल मार्केट' कहा जाता है।

शेयर बाजार के जानकार का कहना है कि इस दौरान निवेशकों का भरोसा बहुत मजबूत होता है। लोगों को लगता है कि आने वाले समय में कीमतें और बढ़ेंगी, इसलिए वे जमकर खरीदारी करते हैं। कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है, नए-नए IPO बाजार में आते हैं और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

2.Bear Market क्या होता है?

इसके विपरीत, जब शेयर बाजार (Bear Market vs Bull Market in Hindi) अपने हाल के उच्चतम स्तर से 20% या उससे अधिक गिर जाता है और यह गिरावट कई हफ्तों या महीनों तक जारी रहती है, तो उसे 'बियर मार्केट' कहते हैं।

इस दौर में निवेशकों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल होता है। लोग नुकसान के डर से अपने शेयर सस्ते दामों पर बेचने लगते हैं, जिससे बाजार और नीचे गिर जाता है। बियर मार्केट अक्सर किसी आर्थिक मंदी, युद्ध, महामारी या खराब सरकारी नीतियों के कारण आता है।

इन दोनों के बीच के मुख्य अंतर को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखें। इससे आपको Difference Between Bull And Bear Market in Hindi पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा:

मुख्य अंतर की तालिका

तुलना का आधारबुल मार्केट (Bull Market)बियर मार्केट (Bear Market)
बाजार की दिशालगातार ऊपर की ओर (Upward Trend)लगातार नीचे की ओर (Downward Trend)
शेयरों की कीमतेंतेजी से बढ़ती हैंलगातार घटती हैं
निवेशकों की भावनासकारात्मकडर, निराशा और अनिश्चितता
अर्थव्यवस्था की स्थितिGDP बढ़ती है, रोजगार के मौके मिलते हैंGDP ग्रोथ धीमी होती है, मंदी का डर होता है
ट्रेडिंग वॉल्यूमबाजार में खरीदारी बहुत ज्यादा होती हैबाजार में Selling ज्यादा होती है
लिक्विडिटी (नगदी)बाजार में पैसे का फ्लो बहुत अच्छा होता हैलोग पैसा बाजार से निकालकर सुरक्षित जगह रखते हैं

निवेश रणनीति में क्या अंतर है?

हाँ, यह बात सही है कि बुल मार्केट में हर तरफ मुनाफा दिख रहा होता है, इसलिए यहाँ जोखिम यह होता है कि लोग लालच में आकर किसी भी खराब कंपनी में पैसा लगा देते हैं। वहीं बियर मार्केट में जोखिम बहुत ज्यादा दिखता है, लेकिन वास्तव में यही वह समय होता है जब बेहतरीन कंपनियों के शेयर बहुत ही सस्ते दामों पर मिल रहे होते हैं।

Bulls और Bears मार्केट में क्या अंतर है?

अगर हम व्यावहारिक तौर पर देखें कि Bull aur Bear Mein Kya Antar Hai, तो यह सिर्फ आंकड़ों का नहीं बल्कि इंसानी व्यवहार का अंतर है।

  1. निवेशकों का व्यवहार: बुल मार्केट में लोग 'FOMO' Fear of Missing Out यानी पीछे छूट जाने का डर का बना रहता है। इस स्थिति में निवेशक यह सोचते हैं कि अगर आज शेयर नहीं खरीदा तो मौका हाथ से निकल जाएगा। इसके उलट, बियर मार्केट में लोग घबराहट में आकर अपने अच्छे शेयरों को भी औने-पौने दाम पर बेच देते हैं।
  2. अवधि का प्रभाव: लंबी अवधि के निवेशक बियर मार्केट से नहीं डरते, क्योंकि वे जानते हैं कि इतिहास गवाह है कि हर मंदी के बाद एक बड़ी तेजी आती है। वहीं छोटी अवधि के ट्रेडर्स के लिए दोनों बाजारों में काम करने के तरीके पूरी तरह बदल जाते हैं। बुल मार्केट में वे 'Buy on Dip' यानी कि गिरावट पर खरीदें की रणनीति अपनाते हैं, जबकि बियर मार्केट में वे 'Sell on Rise' यानी कि उछाल पर बेचें का नियम अपनाते हैं।

Bull Market की प्रमुख विशेषताएं

  1. कीमतों में निरंतर वृद्धि: कुछ चयनित शेयरों के अलावा लगभग हर सेक्टर के शेयरों के दाम ऊपर की तरफ भागते हैं।
  2. निवेशकों का अटूट विश्वास: बहुत बार ऐसा देखा गया है कि जब भी मार्केट में कोई पॉजिटिव ख़बर आती है तो इस स्थिति में लोग बिना किसी डर के मार्केट में बड़ा निवेश करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
  3. आर्थिक विकास: Bull मार्केट की वजह से देश की जीडीपी (GDP) दर मजबूत होती है और कॉर्पोरेट प्रॉफिट में भारी उछाल आता है।
  4. IPO की बाढ़: नई कंपनियां बाजार से पैसा जुटाने के लिए अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाती हैं, जो आसानी से सुपरहिट हो जाते हैं।

Bear Market की प्रमुख विशेषताएं

  1. लगातार गिरावट का दौर: जब मार्केट निरंतर नीचे की ओर गिरता है, तो उस समय अच्छे से अच्छे और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर भी अपनी वैल्यू खोने लगते हैं।
  2. चारों तरफ घबराहट: Bear Market ट्रेंड की वजह से मीडिया और बाजार के जानकारों के बीच केवल नुकसान और मंदी की बातें होती हैं।
  3. कम ट्रेडिंग वॉल्यूम: इस प्रकार के ट्रेंड में लोग नया पैसा लगाने से बचते हैं, जिससे बाजार में खरीदारों की संख्या काफी कम हो जाती है।
  4. सुरक्षित संपत्तियों की तरफ झुकाव: निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर गोल्ड या सरकारी बॉन्ड्स जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं।

दोनों मार्केट का इतिहास (Bull vs Bear Market History in Hindi)

जब इन मार्केट  (bear market vs bull market in hindi) के इतिहास को देखेंगे, तो आपको पता चलेगा कि बाजार हमेशा एक चक्र में काम करता है। कोई भी तेजी हमेशा के लिए नहीं होती और कोई भी मंदी स्थायी नहीं होती। आइए bull vs bear market history के कुछ बड़े पन्नों को पलटते हैं:

दुनिया के प्रसिद्ध Bull Markets

  1. 1980-2000 का अमेरिकी Bull Run: ऐसा बताया जाता है कि इस दौर में कंप्यूटर और इंटरनेट की शुरुआत हुई थी। अमेरिकी बाजार ने लगभग 20 सालों तक ऐतिहासिक बढ़त देखी, जिसने लाखों लोगों को करोड़पति बना दिया।
  2. 2009 के बाद का वैश्विक वैश्वीकरण: 2008 के महासंकट के बाद, अमेरिकी और भारतीय बाजारों ने इतिहास की सबसे लंबी तेजी देखी, जो 2020 की शुरुआत तक चली। इसमें एप्पल, अमेज़न और रिलायंस जैसी कंपनियों ने निवेशकों को कई गुना रिटर्न दिया।

दुनिया के प्रसिद्ध Bear Markets

  1. 1929 की महामंदी: शेयर मार्केट (Bear Market vs Bull Market in Hindi) का अधिक ज्ञान रखने वाले लोगों का कहना है कि यह इतिहास का सबसे खतरनाक बियर मार्केट था। अमेरिकी शेयर बाजार पूरी तरह तबाह हो गया था और अर्थव्यवस्था को उबरने में सालों लग गए थे।
  2. 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट: वर्ष 2008 में अमेरिका के बैंकिंग सिस्टम के फेल होने के कारण पूरी दुनिया के शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गए थे। इतना ही नहीं, भारतीय बाजार भी इस दौरान लगभग 50-60% तक गिर गया था।
  3. 2020 कोविड-19 मार्केट क्रैश: मार्च 2020 में कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन से घबराकर कुछ ही दिनों में भारतीय बाजार 30% से ज्यादा टूट गया था। हालांकि, यह इतिहास का सबसे छोटा बियर मार्केट साबित हुआ।

इतिहास से मिलने वाले निवेश सबक

इतिहास से हमें सबसे बड़ा सबक यह मिलता है कि बियर मार्केट में जो निवेशक अपनी घबराहट पर काबू पा लेते हैं और अच्छे शेयरों को बेचे बिना होल्ड करके रखते हैं, आने वाला बुल मार्केट (bear market vs bull market in hindi) उन्हें सबसे ज्यादा रिवॉर्ड यानी कि मुनाफा देता है।

भारतीय शेयर बाजार में Bull और Bear Market का सफर

भारतीय शेयर बाजार (NSE और BSE) ने भी कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। क्या आपको पता है कि भारत का सबसे बड़ा Bull रन कब आया था? बता दें कि भारत का सबसे पहला बड़ा 'बुल रन' 1990 के दशक की शुरुआत में देखा गया था जिसे हर्षद मेहता दौर भी कहा जाता है। इसके बाद 2003 से 2008 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी विकास के कारण सेंसेक्स ने नई ऊंचाइयों को छुआ।

Bull Market और Bear Market को कैसे पहचानें?

यदि आप बाजार (Bear Market vs Bull Market in Hindi) की चाल को समझना चाहते हैं, तो आपको निम्नलिखित बातों का खास ध्यान रखना होता है जैसे कि :-

  • इंडेक्स की चाल: यदि निफ्टी और सेंसेक्स लगातार अपने 200-दिनों के मूविंग एवरेज (200 DMA) के ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, तो यह बुल मार्केट का संकेत है। इसके नीचे जाने पर बियर मार्केट की शुरुआत मानी जाती है।
  • आर्थिक संकेतक: देश की जीडीपी ग्रोथ, ऑटो सेल्स के आंकड़े और मैन्युफैक्चरिंग डेटा अगर मजबूत आ रहे हैं, तो बाजार में तेजी बनी रहेगी।
  • ट्रेडिंग वॉल्यूम: बुल मार्केट में जब भी बाजार ऊपर जाता है, तो बहुत भारी मात्रा में शेयर्स की खरीद की जाती है। बियर मार्केट में वॉल्यूम कम होने लगता है।
  • ब्याज दरें: जब रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को कम करता है, तो बाजार में पैसा आता है और बुल मार्केट को बढ़ावा मिलता है। ब्याज दरें बढ़ने पर बियर मार्केट का खतरा बढ़ता है।
  • कॉर्पोरेट अर्निंग्स: कंपनियों के हर तिमाही के नतीजे अगर उम्मीद से बेहतर आ रहे हैं, तो बाजार का मूड 'बुलिश' रहता है।

निवेश की सही रणनीतियाँ कौन-सी हैं?

चाहे बाजार (Bear Market vs Bull Market in Hindi) ऊपर जा रहा हो या नीचे, एक बेहतर निवेशक हर स्थिति में पैसा बनाने का रास्ता ढूंढ ही लेता है। नीचे बताई गई बातों की मदद से आपको पता चल जाएगा कि आपको Bull व Bear मार्केट में कैसे निवेश करना चाहिए?

Bull Market के दौरान निवेश कैसे करें?

  • मजबूत कंपनियों में बने रहें: एक्सपर्ट की सलाह है कि केवल इसलिए कोई शेयर न खरीदें क्योंकि वह भाग रहा है। कंपनी के बिजनेस को देखकर ही निवेश करें।
  • विविधता का महत्व: अपने पूरे पैसे को किसी एक सेक्टर जैसे कि सिर्फ आईटी या सिर्फ बैंक में न लगाएं। अपने पोर्टफोलियो को अलग-अलग सेक्टर्स में बांटें।
  • लालच और टिप्स से बचें: अधिकतर ऐसा देखा गया है कि इस दौरान सोशल मीडिया पर फर्जी टिप्स की बाढ़ आ जाती है। बिना रिसर्च के पेनी स्टॉक्स में पैसा लगाने से बचें।

Bear Market के दौरान निवेश कैसे करें?

  • घबराकर पैनिक सेलिंग न करें: जब तक आपको पैसों की सख्त जरूरत न हो, अपने बेहतरीन शेयरों को घाटे में न बेचें।
  • SIP (Systematic Investment Plan) जारी रखें: मंदी का समय म्यूचुअल फंड SIP के लिए अमृत समान होता है। इस समय आपको कम पैसों में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।
  • क्वालिटी पर ध्यान दें: बियर मार्केट में केवल उन कंपनियों में पैसा लगाएं जिनके पास भारी कैश रिजर्व हो और जिनका कर्ज बहुत कम हो।

Bulls और Bears मार्केट में क्या है बेहतर?

ऊपर दिए गए आर्टिकल को पढ़कर अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिरकार Bear or Bull Which is Better यानी दोनों में से कौन सा बाजार ज्यादा अच्छा है?

इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप बाजार में क्या भूमिका निभा रहे हैं, जैसे कि:-

  • ट्रेडर्स के लिए: जो लोग इंट्राडे या ऑप्शन ट्रेडिंग करते हैं, उनके लिए दोनों ही बाजार अच्छे हैं। वे बुल मार्केट में शेयर खरीदकर पैसा कमाते हैं और बियर मार्केट में 'शॉर्ट सेलिंग' करके मुनाफा कमाते हैं।
  • लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए: लंबी अवधि के निवेशकों के लिए Bear Market ज्यादा बेहतर माना जाता है। इसका कारण यह है कि बुल मार्केट आपको अमीर दिखाता है, लेकिन बियर मार्केट आपको वास्तव में अमीर बनने का 'मौका' देता है।

आम निवेशकों द्वारा की जाने वाली गलतियां

बुल मार्केट में होने वाली गलतियां:

  • ओवर-लेवरेजिंग यानी कर्ज लेकर निवेश: लोग ज्यादा मुनाफे के चक्कर में लोन लेकर या दोस्तों से उधार मांगकर शेयर बाजार में लगा देते हैं, जो बहुत खतरनाक है।
  • FOMO के चक्कर में टॉप पर खरीदना: किसी शेयर के 5 गुना बढ़ जाने के बाद उसमें एंट्री लेना भारी नुकसान का कारण बनता है।

बियर मार्केट में होने वाली गलतियां:

  • निराश होकर बाजार छोड़ देना: कई लोग मंदी के दिनों में अपना पोर्टफोलियो बंद कर देते हैं और कसम खा लेते हैं कि कभी शेयर बाजार में नहीं आएंगे। ऐसा करके वे आने वाली अगली बड़ी तेजी का मौका खो देते हैं।
  • गिरते हुए चाकू को पकड़ना: बिना किसी रिसर्च के किसी बेहद खराब या दिवालिया होने की कगार पर खड़ी कंपनी के शेयर सिर्फ इसलिए खरीदना क्योंकि वह 90% गिर चुका है।

नए निवेशकों के लिए 4 जरूरी सुझाव

  1. बाजार के चक्र को समझें: बाजार में मौजूद हर व्यक्ति को यह बात पता होनी चाहिए कि उतार-चढ़ाव शेयर बाजार का नियम है। कोई भी ग्राफ सीधा ऊपर नहीं जाता।
  2. हमेशा रिसर्च करें: मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर निवेशकर्ता को अच्छे से रिसर्च करने के बाद ही शेयर मार्केट में निवेश करना चाहिए। ध्यान रहें कि किसी के कहने पर नहीं, बल्कि खुद कंपनी के मुनाफे, कर्ज और काम-काज को देखकर ही निवेश का फैसला लें।
  3. भावनाओं को काबू में रखें: क्या आपको पता है कि बाजार में आपका सबसे बड़ा दुश्मन आपका अपना डर और लालच है। हमेशा एक अनुशासित निवेशक बनें।
  4. इमरजेंसी फंड अलग रखें: अपने घर के खर्चों और आपातकालीन जरूरतों के पैसों को कभी भी शेयर बाजार में न लगाएं। बाजार में केवल वही पैसा लगाएं जिसकी आपको अगले 3 से 5 साल तक जरूरत न हो।

भविष्य में Bull और Bear Market का महत्व

जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल हो रही है, शेयर बाजार (Bear Market vs Bull Market in Hindi) के काम करने का तरीका भी बदल रहा है। आज AI (Artificial Intelligence) और एल्गोरिदम ट्रेडिंग के आने से बाजार बहुत तेजी से रिएक्ट करता है। आने वाले समय में वैश्विक घटनाएं बुल और बियर मार्केट के चक्र को और छोटा या अधिक उतार-चढ़ाव वाला बना सकती हैं। लेकिन एक बात तय है कि जब तक दुनिया में व्यापार रहेगा, तब तक बुल और बियर का यह खेल भी हमेशा चलता रहेगा।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहें तो, बुल मार्केट और बियर मार्केट शेयर बाजार के दो ऐसे पहलू हैं जिनके बिना बाजार का अस्तित्व ही संभव नहीं है। जहां बुल मार्केट हमें आगे बढ़ने का उत्साह देता है, वहीं बियर मार्केट हमें धैर्य, अनुशासन और सही कंपनियों को चुनने की समझ सिखाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

यह नाम दोनों जानवरों के हमला करने के तरीके पर पड़ा है। सांड (Bull) अपने सींग नीचे से ऊपर की ओर उठाता है, जो तेजी को दिखाता है। वहीं भालू (Bear) अपने पंजे ऊपर से नीचे की ओर मारता है, जो मंदी को दिखाता है।

इतिहास के अनुसार, एक बियर मार्केट औसतन 9 महीने से लेकर 2 साल तक चल सकता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मंदी का कारण कितना गंभीर है।

जी हाँ, शॉर्ट सेलिंग का मतलब होता है किसी शेयर को महंगे दाम पर पहले बेचना और दाम गिरने पर उसे नीचे खरीद लेना। ट्रेडर्स मंदी के बाजार में इस तकनीक से बहुत मुनाफा कमाते हैं, लेकिन यह काफी जोखिम भरा होता है।

नए निवेशकों को घबराकर अपने शेयर नहीं बेचने चाहिए। इसके बजाय उन्हें अच्छे फंडामेंटल वाले लार्ज-कैप शेयर्स या इंडेक्स म्यूचुअल फंड्स में अपनी SIP को जारी रखना चाहिए।

बिल्कुल होती है। बुल मार्केट के अंतिम दौर में कई खराब कंपनियों के दाम भी बिना किसी कारण के बढ़ने लगते हैं। लालच में आकर गलत कंपनियों में निवेश करने से भारी नुकसान हो सकता है।

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