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Kalava in Hindi: पूजा में कलावा क्यों बांधा जाता है? जानें इसे पहनने के नियम और महत्व

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Kalava in Hindi: पूजा में कलावा क्यों बांधा जाता है? जानें इसे पहनने के नियम और महत्व

हिंदू धर्म में होने वाले हर छोटे-बड़े पूजा-पाठ, शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठानों में कलावा (Kalava in Hindi) बांधने की परंपरा बेहद प्राचीन और पवित्र रही है। सनातन धर्म में Kalava यानी मौली को केवल एक साधारण सूती धागा नहीं माना जाता है, बल्कि भगवान के आशीर्वाद का साक्षात रूप समझा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यदि व्यक्ति अपनी कलाई पर विधि-विधान से रक्षा सूत्र बांधता हैं, तो उसे सभी प्रकार के अनिष्टों, नकारात्मक शक्तियों और संकटों से सुरक्षा मिलती है। आज के इस लेख में हम What is Kalava in Hindi के बारे में जानेंगे। इसके साथ ही हम कलावा का अर्थ, इसके पौराणिक इतिहास, सही मंत्र और इसके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों के बारे में बहुत ही सरल शब्दों में जानेंगे।

What is Kalava in Hindi? इसका धार्मिक महत्व समझें

जैसा कि हम सब जानते हैं कि कलावा सूती धागों से तैयार किया जाने वाला एक पवित्र रक्षा सूत्र है, जिसे आमतौर पर कलाई पर बांधा जाता है। 'कलावा' शब्द का शाब्दिक अर्थ कलाई से जुड़ा हुआ माना जाता है। लेकिन कई जगहों पर इसे 'मौली' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ 'शीर्ष' या 'मुकुट' होता है। हिंदू धर्म में जब भी कभी कोई शुभ कार्य होता है, तो इसे मंत्रोच्चार के साथ कलाई पर लपेटा जाता है, इसे 'रक्षा सूत्र' का नाम दिया जाता है।

  • कलावा का इतिहास और इसकी वैदिक उत्पत्ति: वैदिक काल से ही यज्ञ और पूजा के समय कलावा (Kalava in Hindi) को कलाई पर पर बांधने की परंपरा चली आ रही है। शास्त्रों के मुताबिक, जब भगवान विष्णु के वामन अवतार ने असुर राज बलि का घमंड चूर-चूर किया और तीन पग में सब कुछ नाप लिया, तब उनकी अमरता और रक्षा के लिए उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा गया था। यही कारण है कि आज भी इसे सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।
  • शुभता का प्रतीक: कलावा बांधने का मतलब है कि हम किसी भी शुभ काम को भगवान के साक्षी मानकर शुरू कर रहे हैं।
  • त्रिदेवों का आशीर्वाद: इस पवित्र धागे के तीन रंग लाल, पीला और केसरिया है, जो कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेवों की शक्तियों को दर्शाते हैं।
  • देवियों की कृपा: रक्षा सूत्र को अपनी कलाई पर बांधने से मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां दुर्गा की असीम कृपा व्यक्ति पर हमेशा बनी रहती है।

Kalava Mantra in Hindi और इसकी विधि

जब भी हम अपनी कलाई पर Kalava in Hindi को बांधते हैं, तो उसका पूरा फल तभी मिलता है, जब उसे सही नियमों और मंत्रों के उच्चारण के साथ पहना जाता है। बिना मंत्रोच्चार के इस रक्षा सूत्र को पहना जाता है, तो यह केवल एक साधारण सूती धागा मात्र रह जाता है।

रक्षा सूत्र बांधने का महामंत्र और उसका अर्थ: कलावा बांधते समय पंडित या परिवार के बड़े बुजर्गों द्वारा पौराणिक मंत्रों (Kalava Mantra in Hindi) जैसे- ‘’येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल’’ का जाप किया जाता है, तभी इस रक्षा सूत्र का फल मिलता है।

इस मंत्र का आसान शब्दों में अर्थ यह है कि जिस रक्षा धागा से अत्यंत पराक्रमी दानवराज राजा बलि को बांधा गया था, उसी पवित्र रक्षा सूत्र को मैं तुम्हारी कलाई पर बांधता हूं। हे रक्षा सूत्र, तुम स्थिर रहना और इस व्यक्ति की सभी संकटों से रक्षा करना।


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कलावा बांधने की सही और संपूर्ण विधि (How to Tie Kalava in Hindi?)

शास्त्रों में कलावा (Kalava in Hindi) को पहनते समय कुछ जरूरी नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है, ताकि हमारे आध्यात्मिक और मानसिक संतुलन को बनाए रखा जा सके।

  • पवित्रता का ध्यान: कलावा हमेशा सुबह स्नान आदि करने के बाद, साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही बांधना या बदलवाना चाहिए।
  • मुट्ठी और हाथ की स्थिति: इस धागा को बंधवाते समय व्यक्ति का सिर ढका होना चाहिए, दाहिना (Right) हाथ आगे की तरफ और हाथ की मुट्ठी हमेशा बंद होनी चाहिए।
  • बंधने के फेरे: कलाई पर धागे को लपेटते समय इसे तीन या पांच बार घुमाना चाहिए, जो कि हिंदू धर्म में बेहद शुभ संख्या मानी जाती है।
  • पुरुष और महिलाओं के लिए कलावा बांधने के नियम: शास्त्रों में महिला और पुरुषों दोनों को रक्षा सूत्र बांधने के नियमम अलग-अलग होते हैं। आइए जानते हैं कि महिला और पुरुष को कलावा कैसे पहनना चाहिए।
वर्ग / व्यक्तिसही हाथ (कलावा बांधने के लिए)धार्मिक कारण और मान्यता
पुरुष (Unmarried / Married)दाहिना हाथ (Right Hand)दाहिने हाथ को संकल्प, शक्ति और शुभ कार्यों का मुख्य केंद्र माना जाता है।
अविवाहित कन्याएं (Unmarried)दाहिना हाथ (Right Hand)विवाह से पहले कन्याओं के कर्म और भाग्य का संचय दाहिने हाथ से ही देखा जाता है।
विवाहित महिलाएं (Married)बाया हाथ (Left Hand)विवाह के बाद पति की अर्धांगिनी बनने की वजह से महिलाओं के लिए बायां हाथ शुभ होता है।

 क्या दोनों हाथों में कलावा बांधा जा सकता है?: शास्त्रों के मुताबिक, दोनों हाथों में कलावा नहीं बांधना चाहिए। कलावा हमेशा किसी एक विशिष्ट हाथ में ही पहना जाता है। जैसा कि हम ऊपर समझकर आए हैं कि पुरुषों और अविवाहित कन्याओं के लिए दाहिना हाथ और विवाहित महिलाओं के लिए बायां हाथ तय है। कलावा हमारे शरीर के ऊर्जा प्रवाह और वात-पित्त-कफ को संतुलित करता है।

ऐसे में दोनों हाथों में कलावा बांधने से यह ऊर्जा चक्र प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, दोनों कलाईयों में रक्षा धागा पहनना 'बंधन' या हथकड़ी जैसा प्रतीत होता है, जो शुभ नहीं माना जाता। इसलिए, कलावा केवल नियम के अनुसार सही हाथ या एक ही विशेष हाथ में ही बंधवाना चाहिए।

Benefits of Wearing Kalava in Hindi: इसे पहनने के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक लाभ

कलावा (Kalava in Hindi) को केवल धर्म के विषय के रूप में देखना ठीक नहीं है, क्योंकि यह इससे भी कहीं अधिक ऊपर है। दरअसल, रक्षा सूत्र को हमारे पूर्वजों ने सेहत और मानसिक एकाग्रता को बेहतर बनाने के दृष्टिकोण से भी जीवनशैली में शामिल किया था। आइए कलावा पहनने के मुख्य लाभों के बारे में जानें।

  1. कलावा बांधने के प्रमुख स्वास्थ्य और वैज्ञानिक लाभ: हमारे शरीर की बनावट और नसों का नियत्रंण कुछ इस तरह से होता है कि कलाई पर दबाव पड़ने से सेहत को कई सीधे फायदे मिलते हैं। एक्यूप्रेशर और आयुर्वेद के अनुसार इसके लाभ कई हैं।
  2. त्रिदोष का संतुलन: कलाई पर कलावा को पहनने से शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है, जिससे व्यक्ति कम बीमार पड़ता है।
  3. रक्तचाप पर नियंत्रण: कलाई की नसों पर लगातार हल्का दबाव रहने के कारण शरीर में ब्लड सर्कुलेशन (रक्त प्रवाह) बिल्कुल सामान्य और नियंत्रित रहता है।
  4. हृदय रोग से सुरक्षा: आयुर्वेद के मुताबिक, कलाई से होकर जाने वाली मुख्य नसें सीधे दिल से जुड़ी होती हैं, जिससे कलावा दिल संबंधी समस्याओं जैसे- हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है।

मानसिक और आध्यात्मिक लाभ: जब हम अपनी कलाई पर लाल और पीले रंग का यह पवित्र धागा पहनते हैं तो, हमारे अवचेतन मन में एक सुरक्षा की भावना जाग्रत होती है, जो कि हमें कई गलत कामों को करने से रोकती है और ईश्वर के प्रति हमारी भक्ति को मजबूत करती है। इससे मानसिक तनाव कम होता है, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और नकारात्मक विचार हमारे दिमाग पर हावी नहीं हो पाते हैं।

इतना ही नहीं 'मौली' का शाब्दिक अर्थ है 'सबसे ऊपर'। इसे रक्षासूत्र भी कहते हैं। मान्यता है कि इसे हाथ में बांधने से इंसान को हर तरह के संकटों, बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा मिलती है। पौराणिक मान्यता के अनुरसार, इसकी शुरुआत माता लक्ष्मी ने राजा बली को रक्षासूत्र बांधकर की थी। तब से यह विश्वास चला आ रहा है कि कलावा पहनने वाले की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं।

कलावा के विभिन्न प्रकार और इन्हें बदलने के नियम

सनातन धर्म में Kalava in Hindi सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है। ऐसे में आपको इसके प्रकार और बदलने के नियम के बारे में भी संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए।

Different Types of Kalava on Hand (कलावा के विभिन्न प्रकार)

आमतौर पर हमें सिर्फ लाल और पीले रंग के ही कलावा नजर आते हैं, लेकिन बाजार में परंपराओं के हिसाब से कई अलग-अलग प्रकार के कलावा देखने को मिल जाते हैं, जिनका अपना अलग महत्व होता है।

  1. सूती कलावा (Cotton Kalava): यह सबसे आम और पारंपरिक कलावा माना जाता है, जो कच्चे सूत (धागे) से बनता है। इस कलावा को त्वचा के लिए सबसे अच्छा और आरामदायक माना जाता है।
  2. रेशमी कलावा (Silk Kalava): आजकल विशेष पूजा-पाठ या त्योहारों जैसे रक्षाबंधन या भाई दूज पर रेशम के चमकीले धागों से बने कलावे का इस्तेमाल भी अधिक किया जाने लगा है।
  3. त्रिदेव कलावा (तीन रंगों वाला): इसमें लाल, पीला और हरा (या सफेद) रंग शामिल होता है। यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है।
  4. पंचदेव कलावा (पांच रंगों वाला): इसे पंचरंगा कलावा भी कहते हैं। इसमें लाल, पीला, हरा, सफेद और केसरिया/नीला रंग शामिल होता है। यह कलावा पांच तत्वों और पंचदेवों की कृपा के लिए बांधा जाता है।
  5. ग्रह शांति कलावा: ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों के दोष को दूर करने के लिए भी अलग-अलग रंग के रक्षा सूत्र बांधे जाते हैं। जैसे- शनि देव के लिए नीला/काला या हनुमान जी के लिए शुद्ध लाल/सिंदूरी कलावा पहनने की परंपरा है।
  6. पूजा और यज्ञ में उपयोग होने वाला कलावा: विशेष पूजा और यज्ञ में मुख्य रूप से तीन या पांच रंगों वाले 'त्रिदेव और पंचदेव कलावा' जैसे- केसरिया, पीला, लाल, सफेद, हरा का इस्तेमाल होता है। यह धागा पंचतत्वों और सभी देवी-देवताओं के आह्वान और संकल्प सिद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

कलावा बदलने के नियम: ध्यान दें कि कलावा कभी भी अपनी मनमर्जी से खोलना या बदलना नहीं चाहिए। कलावा बदलने के शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है।

  • सही दिन का चुनाव: पुराना या रंग उड़ा हुआ कलावा बदलने के लिए केवल मंगलवार या शनिवार का दिन ही सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा, आप चाहे तो किसी बड़े त्योहार या संक्रांति पर भी इसे बदल सकते हैं।
  • पुराने कलावे का क्या करें?: कलाई से पुराना कलावा उतारने के बाद उसे कभी भी कचरे में या इधर-उधर पैर के नीचे नहीं फेंकना चाहिए। इसे किसी पवित्र पेड़ जैसे पीपल या बरगद की जड़ के पास रख दें या बहते हुए साफ पानी में प्रवाहित कर दें।
  • अपवित्र होने पर बदलें: यदि घर में किसी का जन्म या मरण हुआ हो (सूतक काल), तो वह समय बीत जाने और घर की शुद्धि होने के बाद पुराना कलावा उतारकर नया कलावा धारण कर लेना चाहिए।

निष्कर्ष

Kalava in Hindi के बारे में अब तो आपको पूरी जानकारी हो गई होगी। लेकिन संक्षिप्त में समझें तो कलावा या रक्षा सूत्र केवल सूती धागे का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सनातनी परंपरा, गहरे विश्वास और वैज्ञानिक सोच का एक बेहतरीन समन्वय है। अगर आप इसे शास्त्र सम्मत तरीके और शुद्ध मंत्रोच्चार के साथ कलाई पर बांधते हैं, तो आपको इसके कई बेहतरीन लाभ जैसे- मानसिक शांति, दृढ़ आत्मविश्वास और बेहतर शारीरिक स्वास्थ्य मिलेगा।

इतना ही नहीं यह रक्षा सूत्र नकारात्मक शक्तियों से भी आपकी ढाल बनकर रक्षा करता है। इसलिए, जब भी आप किसी धार्मिक कार्य, हवन या त्योहार के अवसर पर कलावा धारण करें, तो इसे पूरे नियम, श्रद्धा और पूर्ण विश्वास के साथ ही अपनी कलाई पर बंधवाएं, ताकि आपके जीवन में त्रिदेवों और देवियों की असीम कृपा, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हमेशा बना रहे।

ध्यान रहे कि, कलावा कभी भी अपनी मनमर्जी से न तो उतारे और न ही पहने। कलावा बदलने के शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं जैसे- सही दिन, सही समय पर ही कलावा धारण करें। उचित फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कलावा (Kalava in Hindi) का शाब्दिक अर्थ 'मौली' या 'सबसे ऊपर' होता है। इसे 'रक्षासूत्र' भी कहते हैं, जिसका अर्थ है वह पवित्र धागा जो संकटों से मनुष्य की रक्षा करता है।

शास्त्रों के अनुसार, कलाई पर कलावा हमेशा 3 या 5 बार लपेटने की परंपरा है। कलावा लपेटने की इस संख्या को बेहद शुभ और त्रिदेवों व पंचदेवों का प्रतीक माना जाता है।

कलावा पहनने की कोई निश्चित दिन या संख्या नहीं होती, इसे तब तक पहन सकते हैं जब तक इसका रंग न उड़े या यह अपवित्र न हो। अगर आप इसे बदलना चाहते हैं, तो केवल मंगलवार या शनिवार का दिन ही चुनना चाहिए।

कलावा बांधते समय इस रक्षा मंत्र "येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः, तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल" का जाप किया जाता है, ताकि इसका सही फल मिल सकें।

धार्मिक नियमों के अनुसार, पुरुषों को कलावा हमेशा अपने दाहिने हाथ (Right Hand) में बांधना चाहिए। दाहिने हाथ को सकारात्मक ऊर्जा और कर्म का प्रतीक माना जाता है।

कलावा बांधते समय व्यक्ति की मुट्ठी बंद होनी चाहिए और सिर पर कोई कपड़ा या रुमाल होना चाहिए। इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ कलाई पर धागे को 3 या 5 बार लपेटकर बांधा जाता है।

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